जोखिम ले सकते हैं तो लंबे समय में ज्यादा रिटर्न के लिए इक्विटी बेहतर- अश्विन पाटनी
त्योहारों का सीजन होने के बावजूद शेयर बाजार में कंसोलिडेशन यानी गिरावट का रुख है। सितंबर से जारी गिरावट से निवेशक परेशान हैं। हालांकि लॉन्ग टर्म में भारत की ग्रोथ स्टोरी पर कोई सवाल नहीं है। बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक दशहरा अभी-अभी खत्म हुआ है। यह हमारे लिए भी निवेश की आदतों में से बुरी आदतों को दूर करने का वक्त है। निवेश के मामले में सबसे बड़ी बुराई है ज्यादा का लालच। बाजार में गिरावट के समय पोर्टफोलियो में गिरावट का डर भी बुराई की तरह ही है। इनके नतीजे निवेशक को आगे चलकर भुगतने पड़ते हैं। निवेशक के मन में जब ऐसी भावनाएं प्रबल होती हैं, तब वह पैसे को लेकर जल्दबाजी में फैसले करता है । निवेशक को यह बात समझनी चाहिए कि कोई भी निवेश भविष्य में अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत बनाने के लिए किया जाता है। यह आसानी से पैसे बनाने का जुआ नहीं है। जिस तरह दशहरा भगवान राम के लिए नई शुरुआत है, हमें भी लंबे समय में निवेश की यात्रा शुरू करनी चाहिए ताकि अपने आर्थिक लक्ष्यों को हासिल कर सकें। शॉर्ट टर्म में बाजार की चाल उतार-चढ़ाव वाली हो सकती है, लेकिन लॉन्ग टर्म में बाजार ने हमेशा ज्यादा रि...