जोखिम ले सकते हैं तो लंबे समय में ज्यादा रिटर्न के लिए इक्विटी बेहतर- अश्विन पाटनी

त्योहारों का सीजन होने के बावजूद शेयर बाजार में कंसोलिडेशन यानी गिरावट का रुख है। सितंबर से जारी गिरावट से निवेशक परेशान हैं। हालांकि लॉन्ग टर्म में भारत की ग्रोथ स्टोरी पर कोई सवाल नहीं है। बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक दशहरा अभी-अभी खत्म हुआ है। यह हमारे लिए भी निवेश की आदतों में से बुरी आदतों को दूर करने का वक्त है।

निवेश के मामले में सबसे बड़ी बुराई है ज्यादा का लालच। बाजार में गिरावट के समय पोर्टफोलियो में गिरावट का डर भी बुराई की तरह ही है। इनके नतीजे निवेशक को आगे चलकर भुगतने पड़ते हैं। निवेशक के मन में जब ऐसी भावनाएं प्रबल होती हैं, तब वह पैसे को लेकर जल्दबाजी में फैसले करता है। निवेशक को यह बात समझनी चाहिए कि कोई भी निवेश भविष्य में अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत बनाने के लिए किया जाता है। यह आसानी से पैसे बनाने का जुआ नहीं है।

जिस तरह दशहरा भगवान राम के लिए नई शुरुआत है, हमें भी लंबे समय में निवेश की यात्रा शुरू करनी चाहिए ताकि अपने आर्थिक लक्ष्यों को हासिल कर सकें। शॉर्ट टर्म में बाजार की चाल उतार-चढ़ाव वाली हो सकती है, लेकिन लॉन्ग टर्म में बाजार ने हमेशा ज्यादा रिटर्न दिया है। उदाहरण के लिए देखें तो निफ्टी-50 इंडेक्स 3 महीने में 4.35% गिरा है, लेकिन सितंबर 2018 तक 10 साल में इसने हर साल औसतन 12.3% रिटर्न दिया है।

इस पावन त्योहार पर आपको छोटे लेकिन नियमित निवेश का रास्ता चुनना चाहिए। इससे लंबे समय में आपके पास काफी रकम जमा हो जाएगी। निवेश में समय का योगदान काफी महत्वपूर्ण होता है। उदाहरण के लिए आप सालाना औसतन 12% रिटर्न वाले इंस्ट्रूमेंट में हर महीने 5,000 रुपए लगाएं तो 30 साल बाद आपके पास 1.76 करोड़ रुपए होंगे। अगर औसत रिटर्न 8% है तो 30 साल बाद आपके पास जमा रकम 75 लाख रुपए होगी।

जो निवेशक लंबे समय के लिए पैसे लगाना चाहते हैं और जिनमें थोड़ा जोखिम लेने की क्षमता है, वे इक्विटी स्कीम्स में निवेश कर सकते हैं। शॉर्ट टर्म में इक्विटी स्कीमों में निवेश पर रिटर्न निगेटिव हो सकता है- जैसा अभी हो रहा है। लेकिन अगर निवेश का समय 5 साल या अधिक रहा तो उतार-चढ़ाव का असर बहुत कम हो जाता है। जो निवेशक ज्यादा जोखिम नहीं लेना चाहते वे हाइब्रिड इंस्ट्रूमेंट में पैसे लगा सकते हैं। इस स्कीम का पैसा इक्विटी और डेट इंस्ट्रूमेंट दोनों में लगाया जाता है। एक और बात। हर ऐसेट क्लास में रिटर्न का एक चक्र होता है। इसलिए उचित ऐसेट एलोकेशन से ज्यादा रिटर्न हासिल किया जा सकता है। इस तरह लॉन्ग टर्म में आप ना सिर्फ अपने लिए संपत्ति अर्जित करेंगे बल्कि आर्थिक लक्ष्यों पर आपका नियंत्रण भी रहेगा।

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